पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री ने नेशनल मोनेटाइज़ेशन पाइपलाइन (NMP) 2.0 का शुभारंभ किया है, जिसका लक्ष्य 2025–26 से 2029–30 की अवधि में परिसंपत्ति मुद्रीकरण के माध्यम से ₹16.72 लाख करोड़ एकत्रित करना है।
परिचय
- केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा प्रारंभ किया गया नेशनल मोनेटाइज़ेशन पाइपलाइन (NMP) 2.0, मूल एनएमपी (2021-2025) पर आधारित है और 2026-2030 के लिए ₹16.72 लाख करोड़ का रोडमैप प्रस्तुत करता है।
- यह राजमार्गों और रेलमार्गों जैसी परिचालनात्मक “ब्राउनफील्ड” सार्वजनिक परिसंपत्तियों को निजी निवेश के माध्यम से मूल्य खोलने का लक्ष्य रखता है, ताकि नए ग्रीनफील्ड बुनियादी ढाँचे का वित्तपोषण बिना नया ऋण या कर बढ़ाए किया जा सके।
- यह नीति नीति आयोग द्वारा संबंधित मंत्रालयों के साथ विकसित की गई है, वित्त मंत्रालय द्वारा निर्देशित है और कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाले कोर ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज ऑन एसेट मॉनेटाइजेशन (CGAM) द्वारा निगरानी की जाती है।
प्रमुख उद्देश्य
- वर्तमान परिसंपत्तियों का पुनर्चक्रण कर ₹5.8 लाख करोड़ निजी पूंजीगत व्यय हेतु एकत्रित करना।
- पीपीपी, इन्विट्स (इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स), नकदी प्रवाह प्रतिभूतिकरण और रणनीतिक बिक्री के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना।
- एनएमपी 1.0 से प्राप्त अनुभवों के आधार पर प्रक्रियाओं का मानकीकरण करना, समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करना और आय को भारत की समेकित निधि, सार्वजनिक उपक्रमों या राज्यों में प्रवाहित करना।
प्रमुख क्षेत्रीय आवंटन
- राजमार्ग, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLPs), रोपवे: ₹4.42 लाख करोड़
- विद्युत: ₹2.77 लाख करोड़
- बंदरगाह: ₹2.64 लाख करोड़
- रेलमार्ग: ₹2.62 लाख करोड़
- कोयला: ₹2.16 लाख करोड़
- खनन: ₹1 लाख करोड़
- पूंजी पुनर्चक्रण मॉडल: मोनेटाइज़ेशन ‘एसेट रीसाइक्लिंग’ के सिद्धांत का पालन करता है:
- परिचालनात्मक ब्राउनफील्ड परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण।
- प्राप्त आय का उपयोग ग्रीनफील्ड बुनियादी ढाँचे के वित्तपोषण में।
- इससे राजकोषीय भार और सार्वजनिक ऋण का दबाव कम होता है।
- राजस्व वितरण: प्राप्त आय मुख्यतः भारत की समेकित निधि, प्रत्यक्ष निजी निवेश, सार्वजनिक उपक्रम/बंदरगाह प्राधिकरण आवंटन और राज्य समेकित निधियों में प्रवाहित होने की अपेक्षा है।
एनएमपी 2.0 के लाभ
- पूंजी पुनर्चक्रण: ब्राउनफील्ड परिसंपत्तियों से मूल्य खोलकर नई (ग्रीनफील्ड) परियोजनाओं में पुनर्निवेश, बिना सार्वजनिक ऋण बढ़ाए।
- राजकोषीय समेकन: सरकारी उधारी पर दबाव कम करता है और राजकोषीय घाटे के बेहतर प्रबंधन में सहायक है।
- निजी भागीदारी में वृद्धि: सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को गंभीर करता है, दक्षता, नवाचार और जोखिम-साझाकरण को बढ़ावा देता है।
- दीर्घकालिक संस्थागत पूंजी का आकर्षण: पेंशन फंड, सार्वभौमिक निधि और वैश्विक निवेशकों को भारतीय बुनियादी ढाँचे में आकर्षित करता है।
- परिसंपत्ति दक्षता में सुधार: निजी प्रबंधन परिचालन दक्षता और सेवा गुणवत्ता को बढ़ाता है।
- वित्तीय बाजारों का विकास: इन्विट्स और TOT मॉडल जैसे साधनों को बढ़ावा देता है, जिससे बुनियादी ढाँचा एक परिसंपत्ति वर्ग के रूप में विस्तृत होता है।
- लॉजिस्टिक्स और प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि: राजमार्गों, बंदरगाहों, रेलमार्गों और लॉजिस्टिक्स पार्कों का मुद्रीकरण आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करता है और लेन-देन लागत को कम करता है।
- विकसित भारत दृष्टि का समर्थन: बुनियादी ढाँचा-आधारित विकास को तीव्र करता है, जो 2047 तक विकसित राष्ट्र का दर्जा प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।
- रोज़गार सृजन और गुणक प्रभाव: बुनियादी ढाँचे का विस्तार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न करता है।
- नागरिक भागीदारी: सार्वजनिक इन्विट्स खुदरा निवेशकों को बुनियादी ढाँचे की वृद्धि में भाग लेने का अवसर देते हैं।
एनएमपी 2.0 की चुनौतियाँ
- परिसंपत्ति मूल्यांकन संबंधी चिंताएँ: सार्वजनिक परिसंपत्तियों के अवमूल्यन का जोखिम।
- पारदर्शी और मानकीकृत मूल्यांकन तंत्र का अभाव।
- राजनीतिक एवं जन विरोध: ‘गुप्त निजीकरण’ की धारणा।
- ट्रेड यूनियनों और नागरिक समाज से प्रतिरोध।
- नियामक एवं नीतिगत अनिश्चितता: बार-बार नीति परिवर्तन दीर्घकालिक निवेशकों को हतोत्साहित कर सकते हैं।
- पीपीपी अनुबंधों में सुदृढ़ विवाद समाधान तंत्र की आवश्यकता।
- जोखिम आवंटन मुद्दे: सरकार और निजी क्षेत्र के बीच अनुचित जोखिम-साझाकरण।
- पूर्ववर्ती पीपीपी विफलताएँ (जैसे राजमार्गों में यातायात का अधिक अनुमान) चेतावनी स्वरूप बनी हुई हैं।
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